ब्रिटेन में वेतन व कार्य सुविधाओं में कटौती के विरुद्ध अश्वेत वर्ण के कार्यकर्ताओं के एक गुट ने गुरुवार को मैन्चेस्टर में बैठक कर हालिया विरोध प्रदर्शनों और इस देश की सरकार के क्रियाकलापों की समीक्षा की। इस गुट ने अपने बयान में ब्रितानी सरकार से मांग की कि वह इस देश के युवाओं की शैतानी छवि बनाने के बजाए हालिया अशांति के कारणों की समीक्षा करे व युवाओं के अच्छे भविष्य के बारे में सोचे। इस गुट ने ब्रिटेन के हालिया दमनकारी क़दम की निंदा करते हुए बल दिया कि वह मैन्चेस्टर के श्रम संघ के आगामी प्रदर्शनों में भाग लेगा। इंग्लैंड में पुलिस के हाथों एक अश्वेत वर्ण के युवा की हत्या के विरोध में छह अगस्त को कई सौ लोगों के प्रदर्शन के पश्चात अशांति आरंभ हुई जो इंग्लैंड के अनेक नगरों में फैल गयी। इंग्लिश पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का व्यापक दमन कर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ़तार कर लिया है। इसी प्रकार पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन के हालिया अशांत प्रदर्शनों में भाग लेने वालों की धर-पकड़ तेज़ी से जारी है और अब तक तीन हज़ार लोगों को गिरफ़तार किया जा चुका है। प्रदर्शनकारियों में अधिकांश अश्वेत वर्ण के हैं जिन्हें हालिया वर्षों में ब्रिटेन में भेदभाव का सामना रहा और आर्थिक व सामाजिक दृष्टि से उन्हें इस प्रकार दबाया गया कि उनके पास कार्य के समान अवसर नहीं थे। गिरफ़तार किए गए युवाओं में दो तिहाई से अधिक संख्या बेरोज़गार युवाओं की है जिन्हें ब्रिटेन में विभिन्न रूपों में भेदभाव का सामना है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तक ब्रितानी सरकार युवाओं को शांत करने के लिए हिंसा का सहारा लेगी उस समय तक यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे और यदि ब्रिटेन की कन्ज़र्वेटिव सरकार समस्या का जड़ से समाधान करने का प्रयास करे तो इस संकट को धीरे धीरे नियंत्रित कर लेगी। डेविड कैमरन की गठबंधन सरकार प्रदर्शनकारियों को दंगाई की संज्ञा देकर व विरोध प्रदर्शन के विध्वंसक रूप का हो हल्ला कर इस संकट के प्रकट होने के मुख्य कारण से जनमत के ध्यान को हटाना चाहती है।.........166